मदर्स डे पर मां के संघर्ष, त्याग और हौसले की दो कहानियां, बेटे ने यूपीएससी क्रैक कर पूरा किया सपना

Mothers Day: टी. हुसैन. मदर्स डे पर सफलता की दो ऐसी कहानियां सामने आई हैं, जहां बच्चों की उपलब्धियों के पीछे मां का संघर्ष, त्याग और हौसला सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा। किसी मां ने दोस्त बनकर हर असफलता में संबल दिया, तो किसी मां ने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपने गहने तक गिरवी रख दिए। आज वही बच्चे यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर परिवार और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।
Mothers Day: हर कठिन दौर में दोस्त की तरह साथ खड़ी रहीं मां
भिलाई-दुर्ग से जुड़ी सुष्मिता ने यूपीएससी इंडियन फॉरेस्ट सर्विस परीक्षा में ऑल इंडिया 32वीं रैंक हासिल की है। रिसाली और बिलासपुर से पढ़ाई करने वाली सुष्मिता ने बताया कि यह उनका छठा प्रयास था। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने हैदराबाद में सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम किया, लेकिन सिविल सेवा का सपना उन्हें फिर तैयारी की ओर ले आया।

उन्होंने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय मां इना सिंह को दिया। बीएससी बॉटनी और एमएससी फॉरेस्ट इकोलॉजी की पढ़ाई कर चुकी उनकी मां हर कठिन दौर में दोस्त की तरह साथ खड़ी रहीं। असफलताओं के बीच लगातार हौसला बढ़ाती रहीं और कभी हार नहीं मानने दी। वहीं फॉरेस्ट सर्विस से रिटायर्ड पिता भानुप्रताप सिंह के मार्गदर्शन ने भी तैयारी को मजबूती दी।
एनआईटी से शुरु हुआ अजय का अजेय सफर
रायगढ़ जिले के छोटे से गांव संबलपुरी के किसान परिवार से आने वाले युवा ने यूपीएससी इंडियन फॉरेस्ट सर्विस परीक्षा में ऑल इंडिया 91वीं रैंक हासिल की है। एनआईटी रायपुर से इंजीनियरिंग करने वाले इस युवा ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। खेती से साल में एक बार आमदनी होती थी, जबकि बच्चों की पढ़ाई का खर्च हर महीने आता था। ऐसे में मां श्यामा गुप्ता अपने गहने गोल्ड लोन में गिरवी रख देती थीं, जिससे फीस, किताबें और अन्य जरूरतें पूरी हो सकें।
उन्होंने कहा कि मां ने कभी शिकायत नहीं की और हमेशा बच्चों की पढ़ाई को सबसे ऊपर रखा। यही त्याग उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बना। बाद में उन्होंने नौकरी के साथ तैयारी की और अब यूपीएससी में सफलता हासिल कर मां के सपनों को नई पहचान दी।











