अमेरिका-ईरान के बीच हो गया समझौता? परमाणु कार्यक्रम से लेकर होर्मुज स्ट्रेट तक क्या-क्या हुआ तय

America Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी तनाव अब एक संभावित समझौते की तरफ बढ़ता नजर आ रहा है. हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच बैकडोर बातचीत तेज हुई है, जिसमें पाकिस्तान और कई पश्चिम एशियाई देशों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है. ऐसा माना जा रहा है कि अब दोनों देशों के बीच शांति को लेकर सहमति बन सकती है.
सूत्रों के मुताबिक बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट रहा है. जिसको ईरान ने संघर्ष के दौरान कई बार बंद किया है. इसके साथ ही जब-जब चालू किया तो उसे सीमित तौर पर ही चालू किया है. यहां से गुजरने वाले कई जहाजों पर फायरिंग की घटनाएं भी सामने आई हैं.
यह समुद्री रास्ता दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है. अब प्रस्तावित समझौते में ईरान इस रास्ते को पूरी तरह खोलने पर सहमत हो गया है. ऐसा कहा जा रहा है कि अगर समझौता होता है तो ईरान पूरी तरह से होर्मुज को खोल देगा. इसके बदले अमेरिका कुछ आर्थिक राहत देने पर विचार कर रहा है.

60 दिनों का होगा सीजफायर
शुरुआती ड्राफ्ट में 60 दिन के सीजफायर यानी युद्ध विराम का प्रस्ताव शामिल है. इस दौरान ईरान को तेल बेचने की छूट मिल सकती है और अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी जा सकती है, इसके साथ ही ईरान के विदेशों में फंसे अरबों डॉलर के फंड को चरणबद्ध तरीके से रिलीज करने की चर्चा भी हुई है. कुछ रिपोर्टों में करीब 25 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्तियां खोलने की बात कही गई है. इस मांग पर ईरान शुरुआत से ही अड़ा हुआ है.
परमाणु कार्यक्रम पर क्या होगा?
परमाणु कार्यक्रम पर भी बातचीत का बड़ा फोकस रहा है. अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन सीमित करे, अपने हाई-ग्रेड यूरेनियम स्टॉक को कम करे और परमाणु हथियार नहीं बनाने की सार्वजनिक प्रतिबद्धता दे. ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह बातचीत जारी रखने को तैयार है, लेकिन वह पूरी तरह अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करने के पक्ष में नहीं दिख रहा है.
लेबनान को लेकर भी होगा फैसला
इस संभावित डील का असर लेबनान और पूरे पश्चिम एशिया पर भी पड़ सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार समझौते के तहत इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष को शांत करने की कोशिश भी शामिल है. लेबनान में लंबे समय से जारी हमलों और जवाबी कार्रवाई को रोकने के लिए अलग चैनल से बातचीत चल रही है.
हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष ने अंतिम समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. अमेरिका के भीतर भी इस प्रस्ताव को लेकर विरोध देखने को मिल रहा है. कई रिपब्लिकन नेताओं का कहना है कि ईरान पर नरमी दिखाना भविष्य में खतरा बन सकता है. वहीं ईरान भी चाहता है कि उस पर लगे प्रतिबंध पूरी तरह हटाए जाएं और उसे सुरक्षा की गारंटी मिले.











