देश में शुरू होगा डिजिटल बिजली युग, अब तक 18 राज्य तैयार, उपभोक्ता कभी भी दे सकेंगे बिल

नई दिल्ली. देश में अब बिजली के बिल देने की व्यवस्था खत्म होगी। इसके लिए अब तक 18 राज्य तैयार हो गए हैं। इसे कुछ जगहों पर स्मार्ट मीटर के सहारे तो अन्य में व्यावहारिक रूप से आंशिक तरीके से शुरू किया गया है, लेकिन अब चरणबद्ध तरीके से इन राज्यों में बिल को पूरी तरह डिजिटल कर दिया जाएगा। यह ओटीपी जनरेट बिल रहेगा, जो कि उपभोक्ता कभी भी देख सकेगा। यह उपभोक्ता की जिम्मेदारी रहेगी कि वह बिल देखे और समय पर जमा करें।
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय एजेंसी राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सर्विसेस के जरिए राज्यों के मैन्युअल बिजली बिल खत्म करके डिजिटल बिल करने पर काम हो रहा है। इसके डिजिटल स्पेस नेटवर्क पर ही बिजली बिल को डिजिटल फार्मेट में रखा जाएगा। नई व्यवस्था पर छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश, मिजोरम, असम, कर्नाटक पूरी तरह तैयार हो चुके हैं। झारखंड ने बीते हफ्ते इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है। हालांकि अभी गुजरात और उत्तरप्रदेश अभी इसके लिए तैयार नहीं हैं।
गौरतलब है कि देशभर में अनेक बार बिजली बिल के सरलीकरण की मांग उठती रही है। अभी बिल में विभिन्न ड्यूटी, कर व एफसीए सहित अन्य भार लगाकर गणना होती है। इस कारण बिल को समझना आसान नहीं रहता। इसे लेकर भी राहत दी जा सकती है।
कैसे होगा काम…दस्तावेज के रूप में डिजिटल लिंक शेयर कर सकेंगे : नए सिस्टम में डिजिटल फार्मेट में बिजली बिल रहेगा। उपभोक्ता ओटीपी जनरेट कर उसे कभी भी देख सकेगा। बिल जनरेट होने के बाद निश्चित अवधि में उपभोक्ता को उसे जमा कराना होगा। यह बिल स्टोर की तरह रिअल टाइम लाइव रहेगा, जिससे वेरीफिकेशन सिस्टम में भी पूरी तरह इसका उपयोग होगा। यानी जिन जगहों पर एड्रेस प्रूफ या अन्य दस्तावेज के रूप में बिजली का बिल देना होता है, वहां पर भी डिजिटल बिल का तय शेयरिंग लिंक दे सकेंगे। इससे बिजली बिल वेरीफिकेशन व एड्रेस प्रूफ दस्तावेज के रूप में उपयोग भी मैन्युअल से डिजिटल फार्मेट में बदल जाएगा। इसकी कानूनी प्रमाणिकता भी दी जाएगी।
कई जगह मोबाइल ऐप पर मिल रहे बिल : वर्तमान में राजस्थान सहित कुछ राज्यों में स्मार्ट मीटर लगे हैं, वहां पर बिजली बिल देने की बजाए मोबाइल ऐप पर देखने की सुविधा दी गई है। खास ये कि स्मार्ट मीटर के एप वाले बिल को भी नए सिस्टम में कॉमन प्लेटफार्म पर रखा जाएगा। मध्यप्रदेश सहित कुछ राज्यों के चुनिंदा इलाकों में व्यावहारिक रूप से बिजली बिल देना बंद कर दिए गए हैं। केंद्रीय विद्युत अधिनियम 2020 के संशोधन के तहत बिजली बिल की मैन्युअल डिलीवरी अनिवार्य नहीं है।
1ग्रामीण दूरस्थ इलाके जहां नेटवर्क नहीं है, वहां क्या होगा?जवाब: डिजिटल फॉर्मेट में बिजली बिल कॉमन नेटवर्क पर रहेगा। कहीं नेटवर्क की समस्या है तो ऐसे स्थानों पर फिलहाल जो व्यवस्था है, वह जारी रहेगी। आगे चलकर इसका हल निकलेगा।
2किसी को मैन्युअल बिल चाहिए तो कैसे लेगा?जवाब: डिजिटल फॉर्मेट का प्रिंट लिया जा सकेगा। वेरिफिकेशन कॉमन नेटवर्क पर हो जाएगा।
3यह व्यवस्था कब तक लागू होगी, इसका फायदा क्या?जवाब: इसे अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा। इसमें काफी समय लगेगा। इसका बड़ा फायदा पेपरलेस वर्किंग व ऑनलाइन वेरिफिकेशन का होगा। इससे मैनपावर की कमी की समस्या से निपटा जा सकेगा।
बिजली की प्रमुख राज्यों में स्थिति
राज्य उपभोक्ता सालाना राजस्व (टैरिफ)
मध्यप्रदेश 1.39करोड़ 52.00
राजस्थान 1.35करोड़ 73.14
छत्तीसगढ़ 65.0लाख 25.63
दिल्ली 68.7लाख 31.50
उत्तरप्रदेश 1.52करोड़ 75.35
(आंकड़े करोड़ में)
बिजली बिल का एकीकृत डेटा अध्ययन का आधार भी बन सकेगा। इसके अलावा शिकायतों के समाधान की ओर भी एकीकृत डेटा से आसानी होगी। इसमें हर बिल की शिकायत अलग होती है, लेकिन उसके पैटर्न व खामियों को समझने में आसानी होगी।











