अब पानी भी बचेगा और जीवन आसान भी बनेगा

लंदन. नवाचार और विज्ञान को बढ़ावा देने वाली प्रतिष्ठित जेम्स डायसन अवॉर्ड 2025 प्रतियोगिता के वैश्विक विजेताओं की घोषणा हो गई है। इस साल पोलैंड और इटली के दो युवा आविष्कारकों ने अवॉर्ड जीता। वहीं, मुंह के कैंसर की शुरुआती पहचान करने वाला सुईरहित ‘ऑन्कोअलर्ट’ भारत से पहली बार अवॉर्ड के वैश्विक फाइनल में पहुंचा।

इटली की डिजाइनर एलेसांद्रा गैली ने ‘ऑनक्यू’ नामक कीबोर्ड बनाया है, जो पार्किसंस पीड़ितों के हाथों की कंपकंपी को नियंत्रित करते हुए उनकी टाइपिंग को सहज बनाता है। इसमें विशेष हैप्टिक और विजुअल फीडबैक सिस्टम है।

पोलैंड के वॉरसॉ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधार्थी फिलिप बुड़नी का एआइ आधरित ‘वाटरसेंस’ एआइ-आधारित डिवाइस प्राकृतिक जल प्रवाह से अपनी ऊर्जा लेता है और रीसाइकल पेपर सेंसर से 72 घंटे पहले प्रदूषण की भविष्यवाणी करता है।

विजेताओं को मिलेंगे 35 लाख रुपए

हर साल जेम्स डायसन अवॉर्ड उन छात्रों या हाल के स्नातकों को दिया जाता है जो इंजीनियरिंग या डिजाइन के क्षेत्र में अध्ययनरत हैं। विजेताओं को अपने आविष्कार का विकास करने के लिए 30,000 पाउंड (करीब 35 लाख रुपए) की पुरस्कार राशि दी जाती है। प्रतियोगिता में ऐसी प्रविष्टियां मांगी जाती हैं जो वास्तविक जीवन के मुद्दों से जुड़ी हुई हो और जिनके समाधानों में दुनिया पर असर डालने की क्षमता हो।

ऑन्कोअलर्ट: भारत का सस्ता और सटीक कैंसर डिटेक्टर

ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट की डॉ. जयंती कुमारी डॉ. जयंती कुमारी विकसित ऑन्कोअलर्ट एक कागज-आधारित, नैनो-टेक्नोलॉजी डिवाइस है, जो लार के नमूने से कुछ ही मिनटों में 95त्न सटीकता से मुंह के कैंसर की पहचान करता है। महज 80-100 रुपये की लागत वाला यह उपकरण बिना बिजली या लैब के काम करता है।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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