क्या आपने देखे हैं 1000, 900 और 108 रुपए के सिक्के? प्रदर्शनी में पहुंचे लोग पड़ गए हैरत में

संस्कृति विभाग परिसर में शनिवार को सिक्कों की दुनिया नाम से अनोखी प्रदर्शनी लगाई गई। इस प्रदर्शनी में सैकड़ों साल पुराने दुर्लभ सिक्कों का कलेक्शन दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। लोग इन सिक्कों को उत्सुकता से देखते नजर आए। प्रदर्शनी में ऐसे सिक्के भी शामिल थे जो कभी चलन में नहीं आए, बल्कि विशेष रूप से संग्रहकर्ताओं के लिए जारी किए गए थे। इसी शृंखला में 1000 रुपए, 900 रुपए और 108 रुपए के विशेष स्मारक सिक्के भी प्रदर्शित किए गए। इन सिक्कों ने इतिहास, संस्कृति और परंपरा की झलक प्रस्तुत की। प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों को भारतीय सिक्का परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना रहा।

पार्श्वनाथ भगवान का जन्म कल्याणक

पार्श्वनाथ भगवान के 2900वें जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में जारी स्मारक सिक्के और उससे जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी प्रदर्शित की गई। इसमें बताया गया है कि भगवान पार्श्वनाथ का जन्म वाराणसी के राजा अश्वसेन और रानी वामादेवी के यहां हुआ था। प्रदर्शित सिक्का 900 रुपयए मूल्य का है, जिसका व्यास 44 मिलीमीटर और वजन 40 ग्राम है। यह 99.9% शुद्ध चांदी से निर्मित है। सिक्के पर अंकित ‘रू’ चिन्ह यह दर्शाता है कि इसे भारत सरकार टकसाल, मुंबई में ढाला गया है। यह विवरण जैन धर्म की प्राचीनता और उनके 23वें तीर्थंकर की गौरवशाली विरासत को रेखांकित करता है।

खरतरगच्छ सहस्राब्दी

खरतरगच्छ सहस्राब्दी (1000 वर्ष) के अवसर पर जारी 1000 रुपए का स्मारक सिक्का और उसका इतिहास प्रदर्शित है। इसमें जैनाचार्य श्री जिनेश्वरसूरी को खरतरगच्छ परंपरा का संस्थापक बताया गया है, जिन्होंने शास्त्रार्थ में विजय प्राप्त कर यह विशिष्ट पहचान बनाई। विवरण के अनुसार, इस समुदाय ने पिछले एक हजार वर्षों में साहित्य, कला, मंदिर निर्माण और जीव दया (अहिंसा) के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया है। सिक्के के मुख्य भाग पर अशोक स्तंभ और मूल्य अंकित है। यह प्रस्तुति खरतरगच्छ के समृद्ध इतिहास और समाज सेवा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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