ट्रंप टैरिफ को टक्कर देगी सरकार, सब्सिडी और नए बाजार पर नजर

नई दिल्ली. भारत ने अमरीका की ओर से लगाए गए 50% टैरिफ से निपटने के लिए रणनीति तैयार कर ली है। केंद्र सरकार का मुख्य फोकस एमएसएमई और निर्यातकों को सस्ता लोन उपलब्ध कराने, ब्याज में छूट, सब्सिडी, टैक्स में राहत जैसे माध्यमों से वित्तीय सहायता देने पर है। इसके साथ ही सरकार बाजार विविधीकरण और निर्यातकों की लागत कम करने पर भी विचार कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वरिष्ठ मंत्रियों, वित्त और वाणिज्य अधिकारियों के साथ बैठक की। इनमें कई मुद्दों पर चर्चा की गई। इस बीच अमरीकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि दोनों देशों की कई स्तर पर बात चल रही है। हम अंत में साथ आ जाएंगे।

सूत्रों के मुताबिक सरकार 15,000 करोड़ रुपए की ब्याज समानीकरण योजना को फिर से शुरू करने और रोडटैप योजना में मिलने वाली राशि बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसके साथ निर्यात हब जैसे झींगा, गारमेंट, जेम्स-ज्वैलरी और कालीन के लिए इमरजेंसी क्रेडिट लाइन सुविधा देने और वेतन सहायता का प्रस्ताव भी तैयार हो रहा है। सरकार जल्द 25,000 करोड़ रुपए के एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन को भी मंजूरी दे सकती है। इसके अलावा नए बाजारों पर फोकस के लिए यूरोपीय संघ, खाड़ी और पूर्वी एशिया में विशेष व्यापार मिशन भेजने की भी तैयारी है।

इंडिया+1 रणनीति के तहत यूएई, मैक्सिको और अफ्रीका में निर्यात हब बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि अमरीकी बाजार पर निर्भरता घटाई जा सके। सरकार ने उद्योगों को सलाह दी है कि वह हाई-एंड फैशन, टिकाऊ सीफूड और प्रीमियम ज्वैलरी जैसे मूल्य-वर्धित उत्पादों की ओर रुख करे। सरकार नियामक सरलीकरण और कच्चे माल पर ड्यूटी कटौती जैसे कदमों से निर्यात लागत घटाने पर भी काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भरता पर जोर दिया है। भारत के लिए अगले 3-6 महीने बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इसी दौरान भारत की प्रतिस्पर्धा और निर्यात रणनीति की असली परीक्षा होगी। सरकार का मानना है कि 50 फीसदी टैरिफ से अमरीका को होने वाला 55 फीसदी (48 अरब डॉलर का) निर्यात प्रभावित होगा। वहीं आर्थिक थिंक टैक जीटीआरआइ का अनुमान है कि यह आंकड़ा 60 अरब डॉलर पहुंच सकता है।

क्या है उद्योगों की मांग

नई कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स दर को 1५ फीसदी तक घटाया जाए ताकि निवेश आकर्षित हो और उद्योग जगत को राहत मिले।

एमएसएमई और निर्यातकों को बचाने के लिए 15,000 करोड़ रुपए की ब्याज समानीकरण योजना शुरू करने की मांग।

झींगा, परिधान, आभूषण, कालीन हब के लिए लक्षित क्रेडिट लाइन और वेतन सहायता देने का जीटीआरआइ का प्रस्ताव।

सस्ता कर्ज मिले, भारत में ब्याज दरें 8 से 12 फीसदी के बीच हैं, जबकि चीन और मलेशिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों में यह दर सिर्फ 3 फीसदी के आसपास है।

निर्यात लागत घटाने के लिए नियामकीय सरलीकरण और कच्चे माल पर शुल्क कटौती की मांग।

मानव-निर्मित फैब्रिक से बने अपैरल (रेडीमेड कपड़े) और टेक्निकल टेक्सटाइल के लिए पीएलआइ योजना की मांग।

प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए गारमेंट, जेम्स एंड ज्वैलरी और एग्रो-प्रोसेसिंग में टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन के लिए फंड स्थापित करने की मांग।

जल्द साथ आएंगे दोनों देश

बेसेंटद्ग टैरिफ पर भारत के कड़े रुख को देखते हुए अमरीकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि भारत-अमरीका के संबंध जटिल जरूर हैं, लेकिन अंत में दोनों देश साथ आ जाएंगे। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी के बीच अच्छे रिश्ते हैं। यह केवल रूसी तेल का मामला नहीं है। मुझे लगता है मई या जून तक कोई समझौता हो जाएगा।

2038 तक बन भारत बनेगा दूसरी बड़ी इकोनॉमीद्गअमरीकी टैरिफ के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी खबर आई है। आइटी सर्विस कंपनी ईवाई की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर 20.7 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक 2038 तक अमरीका को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन सकता है।

ये बाधाएं और मजबूत बनाएंगी

वित्त मंत्रालय भारत पर अतिरिक्त अमरीकी टैरिफ लागू होने के बाद वित्त मंत्रालय ने कहा, इस कदम का तत्काल प्रभाव सीमित लग सकता है, लेकिन अर्थव्यवस्था के दूसरे प्रभाव चुनौती पेश कर सकते हैं, जिसका समाधान किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यदि सही तरीके से निपटा जाए तो ये बाधाएं हमें और मजबूत बनाएंगी।

इन कदमों पर सरकार कर रही विचार

अमरीका के साथ ट्रेड डील की कोशिश पर कृषि व डेयरी सेक्टर पर स्टैंड में बदलाव नहीं होगा।

रूस तेल विवाद को बैक-चैनल से सुलझाने की कोशिश। चीन, रूस व ब्राजील के साथ ट्रेड रूट्स की चर्चा।

50 प्रतिशत टैरिफ से 5 क्षेत्रों का बढ़ेगा संकट, 15-20 लाख नौकरियों पर खतरा

शॉर्ट टर्म: नुकसान कम करने पर फोकस

एमएसएमई और निर्यातकों के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन जैसी गारंटी स्कीम लागू करना।

सरकार 4,000 करोड़ की गारंटी स्कीम से 50,000 से अधिक इकाइयों को कवर कर सकती है।

मिड-टर्म: वैकल्पिक बाजारों पर फोकस

बाजार विविधिकरण
सप्लाई चेन का स्थानीयकरण
अमरीकी बाजार के लिए मूल्यवर्धित और प्रीमियम प्रोडक्ट पर फोकस।

बंदरगाहों और एसईजेड में इमरजेंसी फंडिंग, ताकि यूरोप और अफ्रीका को शिपमेंट तेज हो।

लैटिन अमरीका, रूस, अफ्रीका व अन्य देशों के साथ फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट वार्ता तेज करने की तैयारी।

अगले 2 साल में भारतीय निर्यात में अमरीकी हिस्सेदारी को 18त्न से घटाकर 5त्न तक लाना लक्ष्य

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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