बड़ी राहत: दूध-पनीर, रोटी-पराठा से हटेगा जीएसटी!

नई दिल्ली. जीएसटी स्लैब को 4 से घटाकर दो करने और उत्पादों पर लगने वाले टैक्स में कटौती को लेकर जीएसटी काउंसिल की बैठक 3-4 सितंबर को होगी। इस बीच रेट कटौती को लेकर ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (जीओएम: ने अपनी सिफारिशें जीएसटी काउंसिल का सौंप दी हैं, जो इस पर अंतिम फैसला लेगा। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, जीओएम में सेस हटाने को लेकर आम राय नहीं बनी है। कुछ राज्य सेस की जगह एडिशनल ड्यूटी लगाने के पक्ष में हैं।
कुछ राज्य नई जीएसटी दर लगाने के पक्ष में हैं। जीएसटी काउंसिल छात्रों और आम लोगों को बड़ी राहत दे सकता है। शून्य जीएसटी के दायरे में दूध-पनीर, रोटी-पराठा, पिज्जा ब्रेड सहित कई खाद्य उत्पादों को रखने की सिफारिश जीओएम ने की है। इसके साथ ही पेंसिल, इरेजर, मैप-एटलस जैसे शैक्षणिक उत्पादों पर भी जीरो जीएसटी का प्रस्ताव है, जिनपर अभी 5% से 12% तक जीएसटी है। सरकार के इस कदम से आम लोगों को सीधा फायदा मिलेगा क्योंकि इससे बच्चों की पढ़ाई का खर्च नीचे आएगा।

खाने-पीने की ये चीजें होंगी सस्ती
कृषि उत्पादों, फर्टिलाइजर एसिड और बायो-पेस्टिसाइड्स पर जीएसटी घटाकर 5% करने का प्रस्ताव है, जो वर्तमान में 18 फीसदी और 12 फीसदी है। रेडीमेड कपड़ों पर 5% जीएसटी की सीमा 1000 रुपए से बढ़ाकर 2500 रुपए और 2500 रुपए से ऊपर के रेडीमेड गारमेंट्स पर वर्तमान के 12% के बदले 18% किया जा सकता है। इसी तरह किचन वेयर, सोलर कूकर-हीटर जैसे रिन्यूएबल उत्पादों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने का प्रस्ताव है। खाने-पीने की चीजों में मक्खन, धी, डेयरी स्प्रेड, सूखे मेवे, कंडेन्स्ड मिल्क, जैम, फ्रू ट जेली, नमकीन-भुजिया, जूस, फल का पल्प पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% किया जा सकता है। वहीं 18% स्लैब में आने वाले आइसक्रीम, पेस्ट्री, पानी की बॉटल आदि पर भी 5% जीएसटी का प्रस्ताव है।











