ट्रंप टैरिफ: निर्यातकों को राहत पैकेज देने की तैयारी, वित्त मंत्री बोलीं- प्रभावितों को बेसहारा नहीं छोड़ सकते

नई दिल्ली. केंद्र सरकार अमरीकी टैरिफ से प्रभावित निर्यातकों और उद्योगों को राहत पैकेज देने की तैयारी कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सीतारमण ने एक इंटरव्यू में कहा कि सरकार 50 प्रतिशत टैरिफ से प्रभावित लोगों को सहारा देने के लिए कुछ न कुछ सहायता पैकेज जरूर लाएगी। भारत अपने निर्यातकों को बेसहारा नहीं छोड़ सकता।

सरकार उद्योग जगत से टैरिफ और उसके प्रभाव के बारे में बात कर रहे हैं। सरकार ने कुछ योजना बनाई है, उस पर काम चल रहा है। हालांकि उन्होंने राहत पैकेज के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया लेकिन सूत्रों के अनुसार सरकार टैरिफ के कारण सामने आई तत्काल चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक निर्यात सहायता रणनीति को अंतिम रूप दे रही है। आशंका है कि टैरिफ के झटके के कारण निर्यातकों को भुगतान में देरी व ऑर्डर रद्द होने का सामना करना पड़ रहा है। पैकेज प्रभावित उद्योगों व निर्यातकों के लिए नकदी व रोजगार सुरक्षा पर केंद्रित हो सकता है। इसके तहत क्रेडिट लाइन खोलने, कंप्लायंस कम करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। ट्रंप टैरिफ लागू होने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में भी उच्चस्तरीय बैठक हो चुकी है।

इस बीच, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच 50 फीसदी टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा, घबराने की जरूरत नहीं है। अमरीका और भारत के बीच टैरिफ को लेकर उचित और संतुलित समझौता होगा। उन्होंने कहा कि हमारे अमरीका के साथ अच्छे संबंध हैं, जो बरकरार रहेंगे। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।

8 को ब्रिक्स की वर्चुअल बैठक

विदेश मंत्री एस. जयशंकर 8 सितंबर को ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा की ओर से बुलाई गई ब्रिक्स देशों की वर्चुअल बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। बैठक अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की आक्रमक शुल्क नीति के वैश्विक विरोध के बीच हो रही है। भारत और ब्राजील पर अमरीका ने सबसे ज्यादा टैरिफ लगाए हैं। बैठक में ब्रिक्स देश अमरीकी नीतियों को अनुचित बताते हुए एकजुट प्रतिक्रिया और बहुपक्षवाद के समर्थन पर जोर देंगे। हाल ही का एससीओ सम्मेलन भी भारत की रणनीति का अहम संकेत माना गया है।

भले ही अमरीका ने भारतीय सामानों पर भारी टैक्स लगा दिया हो, भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। भारत ऐसा इसलिए करेगा क्योंकि रूसी तेल खरीदना फायदे का सौदा है। उन्होंने कहा कि यह हमें तय करना होगा कि कौन सा (सप्लाई सोर्स) हमें सबसे अच्छा लगता है। इसलिए हम निश्चित रूप से रूस से तेल खरीदेंगे। हमें अपने आर्थिक हितों का ध्यान रखना होगा। -निर्मला सीतारमण

जीएसटी: लाभ लोगों तक पहुंचने पर नजर

सीतारमण ने कहा है कि जीएसटी की दरों में कमी का ट्रंप टैरिफ से कोई संबंध नहीं है। इस पर डेढ़ साल से काम हो रहा था। वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी दरों में कमी का लाभ आम लोगों तक पहुंचना सुनिश्चित करने के लिए अगले एक-डेढ़ महीने तक निगरानी रखी जाएगी। हम यह सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न हितधारकों से बात भी कर रहे हैं। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

लुटनिक का घमंड, बोलेद्ग भारत माफी मांगेगा

रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत के अडिग रहने पर अमरीकी वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक के घमंडी बोल सामने आए हैं। लुटनिक ने कहा कि भारत जल्द ही वाशिंगटन के साथ वार्ता की मेज पर लौटेगा, माफी मांगेगा और ट्रंप के साथ समझौता करने की कोशिश करेगा। इंटरव्यू में लुटनिक ने कहा कि यह ट्रंप पर निर्भर करेगा कि वह मोदी से कैसे निपटेंगे। एससीओ में भारत-रूस-चीन की तिकड़ी पर लुटनिक ने कहा कि भारत को तय करना है कि वह किसके पक्ष में रहना चाहता है।

ट्रंप को अहसास! हमने भारत व रूस को चीन के हाथों खो दिया

ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में यह तस्वीर शेयर की, कहा- इनकी साझेदारी लंबी टिके।
एससीओ की बैठक में सामने आई भारत-रूस-चीन की तिकड़ी पर अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को पहली बार टिप्पणी की जिससे लगा कि उन्हें इस नए शक्ति संतुलन की ताकत का अहसास है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ऐसा लगता है कि हमने भारत-रूस को गहरे व अंधेरे वाले चीन के हाथों खो दिया। उम्मीद करता हूं कि उनकी साझेदारी लंबी टिके व समृद्ध रहे। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने कहा, मुझे इस पर कुछ नहीं कहना है। दोनों देशों में संबंध हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
Back to top button