‘मोबाइल छीन रहा है बचपन, समय रहते संभल जाएं’

रायपुर. गृहस्थ जीवन में मोबाइल का बढ़ता उपयोग बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहा है। इसे लेकर फाफाडीह में अभिभावकों के लिए सेमिनार आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता मुकेश शाह ने कहा कि बच्चों को रात 10 बजे के बाद मोबाइल नहीं देना चाहिए। भोजन, पूजा और परिवारिक समय में मोबाईल से दूरी बनाकर बच्चों से संवाद बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने मोबाइल फ्री जोन और मोबाइल फ्री टाइम जैसे नियम अपनाने की सलाह दी। नौ वर्ष तक के बच्चों को दिन में अधिकतम एक घंटा और 18 वर्ष तक के बच्चों को दो घंटे ही मोबाइल देखने देना चाहिए। उन्होंने ‘30-30-30 फार्मूला’ अपनाकर आंखों को सुरक्षित रखने की भी सलाह दी। इस फार्मूले के तहत 30 मिनट मोबाइल उपयोग के बाद 30 सेकंड के लिए मोबाइल न देखें बल्कि 30 फीट दूर किसी वस्तु या दीवार को देखें। इससे पलकों में नमी बनी रहती है। मुकेश शाह ने चेताया कि अत्यधिक मोबाइल उपयोग से डोपामिन हार्मोन बढ़ता है, जिससे थकान, चिड़चिड़ापन, नींद की कमी और मानसिक तनाव बढ़ता है।

पैरेंट्स इन बातों का रखें ध्यान
भोजन, पूजा और परिवारिक समय में मोबाइल से दूरी रखें।
बच्चों से संवाद बढ़ाएं, उनकी पसंद के कामों में व्यस्त रखें।
रात में मोबाइल सोने से 20 मिनट पहले बंद करें।
ईयरफोन एक घंटे से ज्यादा न चलाएं, बाएं कान में ही उपयोग करें।
फैक्ट फाइल
भारत में 9-16 वर्ष के 1.25 करोड़ बच्चे मोटापे से प्रभावित।
67% बच्चे खाना खाते समय मोबाइल का उपयोग करते हैं।
2000 में 22%, 2022 में 45% और 2030 में 60% तक बढ़ेगी निष्क्रिय जीवन शैली।











