EPFO का बड़ा फैसला: अब PF खाते से निकाल सकेंगे पूरी रकम, केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने दी जानकारी

नई दिल्ली. नौकरीपेशा लोग ईपीएफ खाते से अब 25 फीसदी मिनिमम बैलेंस छोड़कर पूरी राशि निकाल सकेंगे। नई दिल्ली में सोमवार को हुई कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की 238वीं सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने की।
बैठक में तय किया गया कि अब कर्मचारी अपने पीएफ खाते से कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का पूरा अंशदान (100 प्रतिशत ) निकाल सकते हैं। पहले पूरी निकासी रिटायरमेंट या बेरोजगारी की स्थिति में ही संभव थी। किसी सदस्य को बेरोजगारी के एक महीने बाद पीएफ राशि का 75त्न और दो महीने बाद शेष 25त्न निकालने की अनुमति थी। हालांकि, सेवानिवृत्ति पर, बिना किसी सीमा के पूरी राशि निकालने की अनुमति थी। ईपीएफओ ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत पेंशनर्स को घर बैठे डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने की सुविधा मिलेगी। इसकी लागत 50 रुपए प्रति सर्टिफिकेट होगी। यह खर्च ईपीएफओ वहन करेगा।
विश्वास योजना से जुर्माने में राहत :
ईपीएफओ ने पेंडिंग केसों और जुर्माने को कम करने के लिए %विश्वास योजना% शुरू की है। मई 2025 तक 2,406 करोड़ रुपए के जुर्माने और 6,000 से ज्यादा मुकदमे पेंडिंग हैं। इस योजना के तहत अब देरी से पीएफ जमा करने पर जुर्माने की दर को कम कर एक फीसदी प्रति माह कर दिया गया है। 2 महीने तक की देरी पर 0.25त्न और 4 महीने तक की देरी पर 0.50त्न का जुर्माना लगेगा। यह योजना 6 महीने तक चलेगी और जरूरत पड़ने पर इसे 6 महीने और बढ़ाया जा सकता है।
अब आंशिक निकासी के 13 जटिल नियमों को खत्म कर तीन आसान श्रेणियां बना दी गई हैं। इनमें आवश्यक जरूरतें (बीमारी, शिक्षा, शादी), आवास संबंधी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं।
अब शिक्षा के लिए 10 बार और शादी के लिए 5 बार तक निकासी की अनुमति होगी, पहले ये सीमा तीन बार तक ही थी।
आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि 12 माह कर दी गई है।
समय से पहले अंतिम सेटलमेंट की अवधि को 2 महीने से बढ़ाकर 12 महीने और पेंशन की अंतिम निकासी को 2 माह से 36 महीने कर दिया गया है।
पहले विशेष परिस्थितियों के लिए कारण बताना पड़ता था, जिसके चलते कई बार दावे खारिज हो जाते थे। अब सदस्यों को निकासी का कारण बताने की भी जरूरत नहीं होगी। यानी अब क्लेम रिजेक्शन की समस्या नहीं रहेगी।
25 फीसदी न्यूनतम बैलेंस रखना होगा
ईपीएफओ के सीबीटी ने यह भी तय किया है कि सदस्यों को अपने खाते में कम से कम 25फीसदी राशि ‘मिनिमम बैलेंस’ के रूप में बनाए रखनी होगी। इससे उन्हें 8.25फीसदी सालाना ब्याज दर और कंपाउंडिंग के फायदे मिलते रहेंगे, जिससे भविष्य के लिए बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार हो सकेगा। ये बदलाव कर्मचारियों के लिए ‘जीवन को आसान’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन बदलावों से न सिर्फ निकासी आसान होगी, बल्कि डॉक्यूमेंट्स की जरूरत भी खत्म हो जाएगी। अब 100 फीसदी ऑटोमैटिक क्लेम सेटलमेंट की सुविधा मिलेगी, जिससे कर्मचारियों को तुरंत पैसे मिल सकेंगे।











