सपनों को हकीकत में बदलने के लिए सीमाओं को पार करना जरूरी

कानपुर. मेरा नाम सरिता है, जिसका अर्थ है नदी और मैं भी जीवन की धारा में निरंतर बहती रहती हूं। भाग्य ने मेरी शारीरिक क्षमताओं को चुनौती दी, लेकिन मेरी मानसिक शक्ति कभी नहीं हारी। 10 अगस्त 1995 को जब मैं 4 साल की थी, मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। मैं छत पर खेल रही थी। अचानक 11000 वोल्ट का हाईटेंशन तार मुझ पर गिरा। झटका इतना तेज था कि मेरे सिर के बीच से आग की लपटें निकलने लगीं। मैं बच तो गई, लेकिन जब घर लौटी तो मेरे दोनों हाथ गायब थे और दाहिना पैर आधा रह गया था।

ऐसे की शुरुआत: यहीं से मेरे जीवन की नई यात्रा शुरू हुई। जिसमें मैंने अपनी सीमा को पार किया। जनवरी 2024 में राज्य स्तरीय बोशिया टूर्नामेंट में मैंने स्वर्ण पदक जीतकर अपने खेल जीवन की शुरुआत की। फिर वर्ल्ड बोशिया चैलेंजर, काहिरा में दो कांस्य पदक जीते। जनवरी 2025 में 9वीं बोशिया सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में मैंने दो रजत पदक जीते।

सिलेबस में शामिल जीवन की कहानी

2024 में मैंने फैशन की दुनिया में एंट्री की। ट्रिपल एम्प्यूटी होने के बावजूद, मैंने एक लो-कॉस्ट, व्हीलचेयर-माउंटेड 3-इन-1 स्टैंड डिजाइन किया। इसमें अम्ब्रेला होल्डर, यूटिलिटी ट्रे और मैग्नेटिक मोबाइल स्टैंड शामिल हैं। इसे जीरो प्रोजेक्ट कॉन्फ्रेंस 2025 (यूएनओ) में डिस्कवरी अवॉर्ड मिला। मैं मधुबनी कलाकार भी हूं और इसमें चार राष्ट्रीय और एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हूं। मेरी जीवन-कथा एनसीईआरटी की हिंदी पाठ्यपुस्तकों में शामिल है। मुझे अकेले यात्रा करना पसंद है, बच्चों को कला सिखाना अच्छा लगता है।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
Back to top button